Puja

Ujjain

Kalsarp

Kalsarp Dosh

Mangal Dosh

Mangal Dosh Puja

Ujjain Puja
Mahakaleshwar

Kalsarp Puja in Ujjain – Complete Guide

Kalsarp Puja in Ujjain

Kalsarp Puja in Ujjain is performed to reduce the ill effects of Kaal Sarp Dosh caused by the unfavorable placement of Rahu and Ketu in a horoscope. Ujjain, being one of the most sacred cities of India and home to Mahakaleshwar Jyotirlinga, is considered highly auspicious for Kalsarp Shanti Puja.

Kaal Sarp Dosh Puja Benefits

Kaal Sarp Dosh Puja helps in removing obstacles related to career, marriage, health, finance, and mental peace. Performing this puja in Ujjain brings relief from repeated failures, delays, and negative planetary influences.

Mangal Dosh Puja in Ujjain

Mangal Dosh Puja in Ujjain is performed to neutralize the adverse effects of Mars (Mangal Graha). It is especially recommended before marriage to avoid conflicts, delays, and instability in relationships.

Why Perform Kalsarp Puja in Ujjain?

Ujjain is known for its strong spiritual vibrations and Vedic traditions. Performing Kalsarp Puja near Mahakaleshwar Temple under the guidance of experienced Pandits ensures proper rituals as per scriptures.

Kalsarp Puja Vidhi

The Kalsarp Puja Vidhi includes Ganesh Puja, Kalash Sthapana, Rahu-Ketu Shanti, Nag Puja, mantra chanting, and aarti. The rituals are completed in a single day following strict Vedic procedures.

Rahu Ketu Shanti Puja in Ujjain

Rahu Ketu Shanti Puja in Ujjain is performed to balance the malefic effects of Rahu and Ketu. This puja helps in reducing sudden losses, mental stress, and instability in life.

Narayan Nagbali Puja in Ujjain

Narayan Nagbali Puja is performed to get relief from ancestral dosh and unresolved karma. Ujjain is one of the most recommended places for this powerful Vedic ritual.

Best Pandit for Kalsarp Puja in Ujjain

Experienced and knowledgeable Pandits in Ujjain perform Kalsarp Puja with complete Vedic rituals, ensuring accuracy, purity, and spiritual effectiveness.

Cost of Kalsarp Puja in Ujjain

The cost of Kalsarp Puja in Ujjain depends on the type of dosh, number of rituals, and puja materials. It generally includes samagri, pandit dakshina, and puja arrangements.

Important Guidelines for Devotees

Devotees should follow basic puja guidelines such as fasting, wearing clean clothes, and maintaining purity during the rituals. Withdrawal or cancellation after booking is not allowed.

हमारे पूजा ब्लॉग पोस्ट

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा: महत्व और शांति का मार्ग

नमस्कार दोस्तों! 🙏
आज हम बात करेंगे उज्जैन नगरी की, जो न केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थल मानी जाती है।
🐍 क्या है कालसर्प दोष?
कालसर्प दोष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में तब बनता है जब सभी सातों ग्रह राहु (नाग का मुख) और केतु (नाग की पूँछ) के बीच आ जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई तरह की कठिनाइयाँ, बाधाएँ, मानसिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याएँ, करियर में रुकावट और वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ ला सकता है।
🔱 उज्जैन में ही क्यों कालसर्प दोष पूजा?
उज्जैन को इस दोष की शांति के लिए सबसे उत्तम स्थानों में से एक माना जाता है, इसके पीछे कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण हैं:
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: उज्जैन भगवान शिव (महाकाल) की नगरी है। महाकाल को काल के अधिपति (समय के स्वामी) के रूप में पूजा जाता है। चूँकि यह दोष काल से जुड़ा है, इसलिए माना जाता है कि महाकाल के चरणों में की गई पूजा इसके नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करने में अत्यंत शक्तिशाली होती है।
  • क्षिप्रा नदी का तट: यहाँ की पवित्र क्षिप्रा नदी मोक्षदायिनी मानी जाती है। नदी के तट पर किए गए अनुष्ठान, जैसे कि राम घाट पर, पूजा के प्रभाव को और बढ़ा देते हैं।
  • प्राचीन तंत्र विद्या: उज्जैन में यह पूजा प्राचीन वैदिक और तांत्रिक विधियों के अनुसार की जाती है, जिसे विशेषज्ञ पंडितों द्वारा संपन्न किया जाता है।
  • मंगलनाथ मंदिर: कुछ लोग मंगलनाथ मंदिर में भी कालसर्प दोष की पूजा कराते हैं, क्योंकि यह मंदिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
📜 पूजा की प्रक्रिया (संक्षेप में)
कालसर्प दोष पूजा एक विस्तृत वैदिक अनुष्ठान है, जिसकी अवधि सामान्यतः 1 से 3 घंटे तक होती है। इस पूजा की प्रक्रिया में मुख्य रूप से ये चरण शामिल होते हैं:
  1. संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले जातक अपना नाम, गोत्र और दोष निवारण का संकल्प लेता है।
  2. गणेश पूजा और नवग्रह पूजा: सभी देवी-देवताओं और नवग्रहों का आह्वान किया जाता है ताकि पूजा में कोई विघ्न न आए।
  3. नाग-नागिन की पूजा: ताँबा, चाँदी या सीसा धातु से बनी नाग-नागिन की मूर्तियों का विशेष पूजन होता है।
  4. राहु-केतु के मंत्रों का जाप: दोष को शांत करने के लिए राहु और केतु के मंत्रों का विशेष रूप से जाप किया जाता है।
  5. विसर्जन: पूजा के अंत में सर्प मूर्तियों को विधि-विधान से क्षिप्रा नदी में विसर्जित किया जाता है।
  6. वस्त्र और नियम: पूजा के दिन उपवास रखना होता है और काले या हरे रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। पूजा के बाद पहने हुए कपड़ों को वहीं छोड़ना आवश्यक माना जाता है।
✨ पूजा के लाभ
इस पूजा को करवाने से जातक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं:
  • नकारात्मक प्रभाव में कमी: कालसर्प दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  • करियर और व्यवसाय में प्रगति: जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
  • सुख-समृद्धि: पारिवारिक जीवन में शांति और सौहार्द आता है।
  • आध्यात्मिक शांति: मानसिक तनाव दूर होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।
यदि आप भी अपनी कुंडली में कालसर्प दोष से पीड़ित हैं, तो एक बार उज्जैन आकर महाकाल का आशीर्वाद लेना और यह पूजा करवाना आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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महाकाल की नगरी उज्जैन: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का अद्भुत दर्शन

✨ स्वयं काल के नियंत्रक जहाँ विराजमान हैं!
यदि आप भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की गहराई को महसूस करना चाहते हैं, तो एक बार आपको उज्जैन (Ujjain) की पवित्र भूमि पर अवश्य कदम रखना चाहिए। यह वह नगरी है जहाँ भगवान शिव बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री महाकालेश्वर के रूप में विराजमान हैं। उज्जैन का अर्थ ही है 'महान विजय' और यहाँ आने वाले हर भक्त को महाकाल अपने सभी कष्टों और 'काल' (समय) के भय से मुक्ति प्रदान करते हैं।
⏳ महाकालेश्वर मंदिर का अद्वितीय महत्व
महाकालेश्वर ही एकमात्र ऐसे ज्योतिर्लिंग हैं जो दक्षिणमुखी हैं। ज्योतिष और तंत्र शास्त्र में दक्षिण दिशा का संबंध मृत्यु और मोक्ष से माना जाता है, इसीलिए महाकाल को काल के नियंत्रक (Controller of Time) या 'मृत्युंजय' भी कहा जाता है।
🔔 भस्म आरती: एक अलौकिक अनुभव
महाकालेश्वर मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण और सबसे अनूठा अनुष्ठान है - भस्म आरती। यह आरती रोज़ाना भोर में (तड़के) आयोजित की जाती है। इस आरती में शिवलिंग का श्रृंगार ताज़ी चिता की भस्म से किया जाता था, जो दर्शाता है कि जीवन अंतिम सत्य (मृत्यु) पर आधारित है। हालांकि, अब इसका स्थान प्रतीकात्मक भस्म ने ले लिया है। इस आरती को देखना एक भक्त के लिए मोक्ष का द्वार खोलने जैसा माना जाता है। इस अलौकिक क्षण को देखने के लिए भक्तों को पहले से बुकिंग करनी पड़ती है।
🌊 शिप्रा नदी का आशीर्वाद
महाकाल मंदिर के निकट ही पवित्र क्षिप्रा नदी बहती है। क्षिप्रा में स्नान का विशेष महत्व है, क्योंकि यह पापों को हरने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। नदी के तट पर स्थित राम घाट पर भक्त पूजा-अर्चना और पिंड दान जैसे अनुष्ठान करते हैं।
🗺️ उज्जैन में और क्या देखें?
महाकालेश्वर के दर्शन के बाद, उज्जैन में कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं जो आपकी यात्रा को संपूर्ण बनाते हैं:
  • काल भैरव मंदिर: जहाँ भैरव बाबा को मदिरा का भोग लगाया जाता है।
  • श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर: जहाँ मंगल और कालसर्प दोष की शांति की जाती है।
  • हरसिद्धि माता मंदिर: शक्तिपीठों में से एक, जहाँ महाराजा विक्रमादित्य पूजा करते थे।
🙏 आपकी यात्रा के लिए कुछ सुझाव
  1. आरती की बुकिंग: भस्म आरती के लिए आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से कम से कम एक सप्ताह पहले बुकिंग करा लें।
  2. वस्त्र कोड: मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है, विशेष रूप से अभिषेक और भस्म आरती के दौरान।
  3. समय: भीड़ से बचने के लिए सप्ताह के दिनों में दर्शन करना बेहतर रहता है।
महाकाल की नगरी में आना केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि समय और काल के रहस्यों को समझने का एक आध्यात्मिक सफर है। एक बार महाकाल के दर्शन मात्र से आपके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार होता है।
जय श्री महाकाल!
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उज्जैन के पंडित: महाकाल की नगरी में आपकी आध्यात्मिक यात्रा के पथ प्रदर्शक

🙏 क्यों उज्जैन है दोष निवारण का केंद्र?
उज्जैन को महाकाल की नगरी कहा जाता है, जहाँ काल (समय) के नियंत्रक स्वयं विराजमान हैं। इस पवित्र भूमि पर किए गए अनुष्ठानों का फल अत्यंत शीघ्र और प्रभावी होता है। यही कारण है कि यह स्थान विशेष रूप से कुंडली दोषों के निवारण, जैसे कालसर्प दोष और मंगल दोष , के लिए भारतभर में प्रसिद्ध है। लेकिन इन जटिल अनुष्ठानों को सही वैदिक विधि से संपन्न कराने के लिए, आपको उज्जैन के विद्वान और अनुभवी पंडितों की आवश्यकता होती है।
🌟 उज्जैन के पंडितों की विशेषताएँ (The Specialty of Ujjain's Pandits)
उज्जैन के पंडित केवल पूजा कराने वाले नहीं होते; वे यहाँ की प्राचीन धार्मिक परंपराओं के संरक्षक और ज्ञान के भंडार होते हैं।
  • पीढ़ीगत ज्ञान (Generational Knowledge): उज्जैन में कई पंडित परिवारों ने अपने पूर्वजों से वैदिक ज्ञान और अनुष्ठानों की शुद्ध पद्धति प्राप्त की है। उनका ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी सदियों पुरानी परंपरा में समाहित है।
  • दोष निवारण में विशेषज्ञता: यहाँ के पंडित विशेष रूप से कालसर्प दोष पूजा (अंगारेश्वर मंदिर या क्षिप्रा तट पर), मंगल भात पूजा (मंगलनाथ मंदिर में) और पितृ दोष शांति (सिद्धवट घाट पर) जैसे विशिष्ट अनुष्ठानों में महारत रखते हैं। उन्हें पता होता है कि किस जातक के लिए कौन सा अनुष्ठान, किस मुहूर्त (शुभ समय) पर और किस मंदिर परिसर में सबसे अधिक फलदायी होगा।
  • शुद्ध वैदिक विधि: वे सुनिश्चित करते हैं कि सभी पूजा पाठ पूरी तरह से शास्त्रों और वैदिक पद्धतियों के अनुसार हों, ताकि जातक को पूजा का संपूर्ण लाभ मिल सके।
🧭 आपके लिए सही पंडित का चुनाव कैसे करें?
एक सफल आध्यात्मिक यात्रा के लिए सही पंडित का चुनाव महत्वपूर्ण है।
  1. अनुभव और प्रतिष्ठा: ऐसे पंडित जी को चुनें जिनका स्थानीय समुदाय में अच्छा अनुभव और सम्मान हो। आप उनके द्वारा की गई पूजाओं के बारे में भक्तों से राय ले सकते हैं।
  2. पारदर्शिता (Transparency): एक अच्छे पंडित पूजा की विधि, लगने वाली सामग्री और दक्षिणा के विषय में पूरी पारदर्शिता बनाए रखते हैं।
  3. पूजा का स्थान: पंडित जी की सेवाएँ कहाँ उपलब्ध हैं? क्या वे महाकाल मंदिर, मंगलनाथ या राम घाट जैसे प्रमुख स्थानों पर अनुष्ठान संपन्न करा सकते हैं?
📞 मार्गदर्शन की आवश्यकता
चाहे आप महामृत्युंजय जाप करवाना चाहते हों, या कुंडली दोषों का समाधान, उज्जैन के पंडित आपकी हर आध्यात्मिक समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं। उनका मार्गदर्शन आपकी यात्रा को सरल, सार्थक और सफल बनाता है।
अगली बार जब आप महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आएं, तो एक योग्य पंडित का सान्निध्य अवश्य प्राप्त करें और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को एक नई दिशा दें।
जय महाकाल!
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कालसर्प दोष और विवाह: क्यों आती हैं शादीशुदा ज़िंदगी में मुश्किलें?

✨ ज्योतिष का रहस्य: कालसर्प दोष क्या है?
भारतीय ज्योतिष में कालसर्प दोष (Kaal Sarp Dosh) को कुंडली का एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है। यह तब बनता है जब किसी जातक की जन्मकुंडली में सभी सात ग्रह, राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूँछ) के बीच आ जाते हैं। इस दोष के कारण जातक को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों—करियर, स्वास्थ्य, और विशेष रूप से विवाह तथा दांपत्य जीवन—में संघर्ष करना पड़ता है।
💍 विवाह पर कालसर्प दोष का प्रभाव
कालसर्प दोष का सीधा असर जातक के सातवें भाव (विवाह और साझेदारी का भाव) पर पड़ता है, जिससे शादीशुदा ज़िंदगी में कई तरह की मुश्किलें आ सकती हैं:
१. विवाह में विलंब (Delay in Marriage)
  • कारण: कालसर्प दोष अक्सर जातक के विवाह की राह में अड़चनें पैदा करता है, जिससे विवाह तय होने में अनावश्यक देरी होती है। बार-बार रिश्ते आते हैं, पर अंतिम समय में टूट जाते हैं।
२. आपसी संबंध में कड़वाहट (Bitterness in Relationship)
  • लगातार संघर्ष: शादी के बाद भी, यह दोष पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और सामंजस्य की कमी पैदा करता है। छोटे-छोटे मुद्दों पर तनाव और झगड़े बढ़ जाते हैं, जिससे संबंध में प्रेम और शांति की कमी महसूस होती है।
३. संतान प्राप्ति में बाधा (Obstacles in Childbirth)
  • पंचम भाव पर असर: यदि यह दोष संतान के भाव (पंचम भाव) को भी प्रभावित कर रहा हो, तो संतान प्राप्ति में कठिनाई या देरी हो सकती है, जो दांपत्य जीवन पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
४. तलाक या अलगाव की स्थिति (Separation or Divorce)
  • अत्यधिक प्रभाव: यदि दोष अत्यधिक बलवान हो, और कुंडली में अन्य ग्रह योग भी विपरीत हों, तो पति-पत्नी के बीच तलाक (Divorce) या लंबे समय तक अलगाव (Separation) की नौबत आ सकती है।
💡 दोष शांति का समाधान (Remedy for Dosh Shanti)
कालसर्प दोष से डरने की बजाय, इसके निवारण पर ध्यान देना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में इसके लिए प्रभावी उपाय बताए गए हैं:
  • कालसर्प दोष निवारण पूजा: इस दोष को शांत करने के लिए उज्जैन के महाकालेश्वर या नासिक के त्र्यंबकेश्वर जैसे पवित्र स्थानों पर विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं। इन पूजाओं में राहु-केतु की शांति और नाग-नागिन के जोड़े का विसर्जन किया जाता है।
  • रुद्राभिषेक: भगवान शिव (जो काल के नियंत्रक हैं) का नियमित रुद्राभिषेक करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
  • नाग देवता की पूजा: हर नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने और शिव मंदिर में चांदी या तांबे के नाग-नागिन चढ़ाने से दोष का प्रभाव कम होता है।
यदि आप या आपका साथी दांपत्य जीवन में ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो किसी विद्वान और अनुभवी पंडित से अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना और सही समय पर दोष निवारण करवाना आपके वैवाहिक जीवन में शांति और स्थिरता ला सकता है।
महाकाल आप पर कृपा करें!
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